Ahinsa Parmo Dharma अहिंसा परमो धर्मः श्लोक का अर्थ

‘ अहिंसा परमो धर्म:’ का प्रयोग मानव जाति के ग्रंथ महाभारत के अनुशासन पर्व में किया था। लेकिन भगवान महावीर ने अहिंसा परमो धर्म: को अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलाई थी। भगवान महावीर की शिक्षा है ”अहिंसा”। आधुनिक काल भारत में महात्मा गांधी ने आजादी के लिये जो आन्दोलन चलाया वह अहिंसात्मक था। हिंदू और जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्व है तथा जैन धर्म के मूलमंत्र में ही अहिंसा परमो धर्म: अर्थात – अहिंसा ही परम धर्म है

 

“”अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च:””

अर्थ – अहिंसा ही परम धर्म है पर धर्म की रक्षा के लिए कि गयी धर्म हिंसा उससे भी बड़ा धर्म है।

अहिंसा परमो धर्मः श्लोक का अर्थ

अहिंसा क्या है? अहिंसा को जानने के लिए हमें योगसूत्र का अध्ययन करना होगा।                  योगसूत्र के अनुसार “अहिंसा” का अर्थ है मन, वाणी और शरीर से किसी भी व्यक्ति को दुख ना पहुँचाना। अर्थात “जब हम किसी भी व्यक्ति के प्रति कटु वचन बोलते हैं या उसे शारीरिक रूप से हानि पहुंचाते हैं, या किसी व्यक्ति के बारे में कुछ गलत सोचते हैं, तो इसे हिंसा माना जाता है।

Ahinsa Parmo Dharma का अर्थ क्या होता है?

अहिंसा परमो धर्म का सही अर्थ भगवान महावीर जी ने अपने अनुयायियों को बताया था।

जिसका बाद में अर्थ का अनर्थ हो गया था।

धरती पर एक ही मनुष्य थे जिनको सही अर्थो मे आत्म ज्ञान हुआ था, जो बाद में भगवान महावीर कहलाए

जिन्होंने आत्मा के बारे में बताया कि,

“आत्मा न तो मरता है और ना ही किसिको मारता है।”

अब लोगों ने इस पर अपनी सत्य बुद्धि आत्मा को छोड़कर,

न जाने अपनी सत्य बुद्धि को किस किस के साथ जोडकर कहा !!! ???

जैसे शरीर के साथ जोडकर,

मन-बुद्धि को शरीर में सत्य बुद्धि को जोड दिया और कहने लगे कि,

बात बरोबर से नहीं कहीं गई…..

अब जिनको आत्म ज्ञान हुआ,

उन्होंने आत्मा के बारे में कहा था।

और आत्मा के आधार पर सारा अस्तित्व टीका है।

अगर मनुष्य जीव की स्थिति आत्म निर्भर हो जाएगी तो,

कल्पना मात्र नाशवंत संसार में ईश्वर अंश अविनाशी जीव नश्वर मनुष्य शरीर धारण कर,

अपने जीवन की धरोहर को लेकर अच्छे से अच्छा जीवन जी सकते है।

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Ahinsa Parmo Dharma Kya Hai किसका है? “अहिंसा परमो धर्मः” किस ग्रंथ से लिया गया है?

भगवान महावीर की मूल शिक्षा है- ‘अहिंसा’। सबसे पहले ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का प्रयोग हिंदुओं का ही नहीं बल्कि समस्त मानव जाति के पावन ग्रंथ ‘महाभारत’ के अनुशासन पर्व में किया गया था। लेकिन इसको अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलवाई भगवान महावीर ने।

भगवान महावीर ने अपनी वाणी से और अपने स्वयं के जीवन से इसे वह प्रतिष्ठा दिलाई कि अहिंसा के साथ भगवान महावीर का नाम ऐसे जुड़ गया कि दोनों को अलग कर ही नहीं सकते। अहिंसा का सीधा-साधा अर्थ करें तो वह होगा कि व्यावहारिक जीवन में हम किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं, किसी प्राणी को अपने स्वार्थ के लिए दुख न दें।

अहिंसा परमो धर्म किसका नारा था?

यह नारा इंसानों के लिए महा अभिशाप, और पैशाचों के लिए महा वरदान साबित हुआ है। निर्दोष जीवों के प्रति अहिंसा परम धर्म है, लेकिन पैशाचिक/पापी जीवों के प्रति यह महापाप है।

इसलिए, यह नारा किसी “पैशाच” आचार्य, जैसे महामद, या उसके पूर्व जन्म का नारा हो सकता है।

इस नारे के असत्य ज्ञान ने, इंसानों को शस्त्र त्याग करने के प्रेरित किया। अपने मन में भी पैशाच पापिओं को क्षमा करने की गलत धारण बना ली।

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