LIC (LIFE INSURANCE CAMPNY) NEW TOP 1 MILLION REGISTRATION

LIFE INSURANCE KYO JARURI HAI??

आज जीवन बीमा कंपनीया market में बहुत सारी है, लेकिन एक विश्वास वाली कंपनी से जीवन बीमा कराना अत्येंत जरूरी है, वर्तमान समय में व्यक्ति को कभी भी कुछ भी होना (जैसे:- दुर्भाग्यपूर्ण घटना का होना) जीवन बीमा एक व्यक्ति और एक कंपनी (बीमा कंपनी) के बीच एक समझौता है जो गारंटी देता है कि बीमा कंपनी पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण घटना में बीमा कंपनी व्यक्ति के परिवार को मृत्यु लाभ का भुगतान करेगी। जिससे परिवार को कोई परेशानी ना हो इसीलिए आज के समय में बीमा करना जरूरी है।

LIC life insurance

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ, भारत में जीवन बीमा कंपनियों को समझना और तुलना करना महत्वपूर्ण है। एक अच्छा जीवन बीमा कंपनी को ढूंढना आसान नहीं है। जहां कुछ कंपनियों का प्रीमियम थोडा होता है, वहीं अन्य का प्रीमियम अधिक होता है। कुछ कंपनियां लम्बासमय प्रदान करते हैं, जबकि अन्य नहीं। और प्रत्येक कंपनी अलग-अलग ऑफर प्रदान करती है।

सबसे अच्छी जीवन बीमा कंपनी वह है जो आपको ठोस ट्रैक रिकॉर्ड के साथ सबसे कम लागत पर सबसे अधिक लाभ देती है और ग्राहक सेवा प्रदान करती है।

Life Insurance Company (LIC)

LIC (Life Insurance Company) बीमा कंपनी भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनीयो में सबसे बड़ी कम्पनी हैं। यह भारत सरकार के अधिकार में है। भारत सरकार द्वारा सर्वप्रथम इसकी स्थापना 1 सितंबर 1956 में की गई थी। तथा इसका मुख्यालय (मुंबई, भारत) में रखा गया था।

life insurance kaise karen

LIC (Life Insurance Company) कम्पनी में प्रमुख व्यक्ति सिद्धार्थ मोहंती थे जिन्हे अध्यक्ष पद के लिए चुना गया था। भारतीय जीवन बीमा निगम कंपनी जीवन बीमा के साथ साथ यह व्यक्ति को और भी लाभ प्रदान कराती है! जैसे:- जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, निवेश प्रबंधन और म्यूचुअल फंड जैसे लाभ भी प्रदान करवाती है।

LIC (Life Insurance Company) कंपनी भारत की सबसे बेहतरीन और अच्छा लाभ प्रदान करने वाली कंपनियों में से एक कंपनी हैं, LIC कम्पनी का स्वामित्व भारत सरकार के अधीन है। एलआईस कम्पनी में कर्मचारियों की बात करे तो इस कम्पनी में 1,20,000+ कार्यरत है।

और अधिक जानकारी के लिए Life Insurance Company ki website पर जाकर आप पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।http://www.licindia.in

ओरिएण्टल जीवन कंपनी भारत की पहली बीमा कंपनी थी जो सन् १८१८ में कोलकाता में बिपिन दासगुप्ता एवं अन्य लोगों के द्वारा स्थापित की गयी। बॉम्बे म्यूचुअल लाइफ अस्युरंस सोसाइटी, जो १८७० में गठित हुई, देश की पहली बीमा प्रदाता इकाई थी।

भारतीय संसद ने १९ जून १९५६ को भारतीय जीवन बीमा विधेयक पारित किया। जिसके तहत ०१ सितम्बर १९५६ को भारतीय जीवन बीमा निगम अस्तित्व में आया। भारतीय जीवन बीमा व्यापार का राष्ट्रीयकरण औद्योगिक नीति संकल्प १९५६ का परिणाम है।

मृत्यु का दावा

यदि प्रीमियम चालू हैं और मृत्यु अनुग्रह अवधि के भीतर होती है, तो मृत्यु दावा राशि देय है। बीमित व्यक्ति की मृत्यु की सूचना प्राप्त होने पर शाखा कार्यालय निम्नलिखित आवश्यकताओं का अनुरोध करता है:

A) दावा फॉर्म ए – दावेदार का बयान, जिसमें मृतक के साथ-साथ दावेदार के बारे में भी जानकारी शामिल है।

B) प्रमाणित मृत्यु रजिस्टर उद्धरण।

C) यदि उम्र स्वीकार नहीं की जाती है, तो उम्र का दस्तावेजी प्रमाण।

D) यदि बीमा एम.डब्ल्यू.पी. के तहत नामांकित, आवंटित या जारी नहीं किया गया है। अधिनियम, यह मृतक की संपत्ति के स्वामित्व के प्रमाण के रूप में कार्य करता है।

E) मूल पॉलिसी दस्तावेज़।

यदि मृत्यु जोखिम की तारीख या पुनरुद्धार/बहाली की तारीख के तीन साल के भीतर होती है, तो निम्नलिखित अतिरिक्त फॉर्म की आवश्यकता होती है।

दावा फॉर्म B – मेडिकल अटेंडेंट का प्रमाणपत्र, जिसे मृतक के मेडिकल अटेंडेंट को उसकी आखिरी बीमारी के दौरान पूरा करना होगा।

  •  दावा प्रपत्र B1 – यदि बीमित व्यक्ति को अस्पताल में उपचार की आवश्यकता है।

 

  •  दावा फॉर्म B2 – उस मेडिकल अटेंडेंट द्वारा भरा जाना चाहिए जिसने मृतक की पिछली बीमारी से पहले देखभाल की थी।

 

  •  दावा फॉर्म C – पहचान और दफन या दाह संस्कार का प्रमाण पत्र, जिसे अच्छे चरित्र और जिम्मेदारी वाले व्यक्ति द्वारा भरा और हस्ताक्षरित किया जाना चाहिए।

यदि बीमित व्यक्ति एक कर्मचारी था, तो नियोक्ता से फॉर्म ई-प्रमाणपत्र का दावा करें।

यदि मृत्यु किसी दुर्घटना या अप्राकृतिक कारण से हुई हो, तो प्रथम सूचना रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रतियां आवश्यक हैं।

यह सुनिश्चित करने के लिए इन अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है कि दावा वास्तविक है, यानी कि मृतक ने कोई भी महत्वपूर्ण तथ्य नहीं छोड़ा है जो प्रस्ताव के समय प्रस्ताव के हमारे अनुमोदन को प्रभावित करता हो। इसके अलावा, ये फॉर्म निगम अधिकारियों द्वारा जांच की स्थिति में हमारी सहायता करते हैं।

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